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छाछ (मट्ठा) बनाने का देसी तरीका – प्यास बुझाने वाला पेय
🌞 गाँव जैसी ठंडी-ठंडी, मसालेदार छाछ – जो दिल और पेट दोनों को ठंडक दे
✍️ Payal, Jaipur | 📅 24 मार्च 2026 | ⏱️ 8 min read
छाछ (मट्ठा) बनाने का देसी तरीका – प्यास बुझाने वाला पेय – ये सवाल मुझसे अक्सर गर्मियों में पूछा जाता है। सच कहूँ तो मैं बचपन से यही देखती आई हूँ कि हमारे यहाँ दोपहर के खाने के बाद एक गिलास ठंडी छाछ जरूर बनती है। नानी कहती थीं, “छाछ पी लो, पेट ठंडा रहेगा और पाचन भी दुरुस्त।”
जो लोग “chaas recipe at home” या “mattha banane ki vidhi” ढूंढते हैं, उनके लिए यह परफेक्ट गाइड है। मैं आपको वही पुराना देसी तरीका बता रही हूँ जो राजस्थान के गाँवों में सदियों से चला आ रहा है – बिना मिक्सर के भी बन सकता है, और सबसे खास है उसका फेंटने का तरीका। तो चलिए, ठंडी-ठंडी छाछ बनाने का राज़ जानते हैं।
📖 रेसिपी इंडेक्स
🛒 सामग्री – देसी छाछ के लिए
| सामग्री | मात्रा |
|---|---|
| ताज़ा दही (गाढ़ा, थोड़ा खट्टा) | 1 कप (200 ग्राम) |
| ठंडा पानी | 3 कप (या जितना पतला करना हो) |
| काला नमक | 1/2 छोटी चम्मच (स्वादानुसार) |
| भुना जीरा पाउडर | 1/2 छोटी चम्मच |
| हरी मिर्च (बारीक कटी) | 1-2 (स्वादानुसार) |
| ताज़ा पुदीना (बारीक कटा) | 1 बड़ा चम्मच |
| हरा धनिया (बारीक कटा) | 1 बड़ा चम्मच |
| बर्फ के टुकड़े | आवश्यकतानुसार |
| वैकल्पिक – तड़का: घी, राई, जीरा, हींग, सूखी मिर्च | 1 छोटी चम्मच घी, 1/2 छोटी चम्मच राई |
📌 राजस्थानी घरों में अक्सर छाछ में थोड़ा सा गुड़ या शक्कर भी डालते हैं – मीठी और नमकीन दोनों वेरिएशन चलती हैं।
🥣 बनाने की विधि – ठेठ देसी अंदाज़
- दही को फेंटें: एक बड़े बर्तन में दही डालें। मथनी या चम्मच से अच्छी तरह फेंटें जब तक दही एकसार और मुलायम न हो जाए। (अगर मिक्सर इस्तेमाल करें तो बहुत तेज़ गति से न फेंटें, वरना झाग बन जाता है।)
- पानी डालें: धीरे-धीरे ठंडा पानी डालते हुए फेंटें। पानी की मात्रा से छाछ की पतली-गाढ़ी तय करें। राजस्थानी स्टाइल में हल्की पतली छाछ पसंद की जाती है।
- मसाले मिलाएँ: काला नमक, भुना जीरा पाउडर, हरी मिर्च, पुदीना और हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिलाएँ। स्वाद चेक करें, जरूरत हो तो और नमक डालें।
- तड़का लगाएँ (वैकल्पिक): छोटी कढ़ाई में घी गरम करें, राई, जीरा और हींग डालें। जब राई चटकने लगे तो सूखी लाल मिर्च डालकर तुरंत छाछ में डालें। इससे राजस्थानी ढाबे जैसा स्वाद आता है।
- ठंडा परोसें: बर्फ के टुकड़े डालें या फ्रिज में ठंडा करें। गिलास में निकालकर ऊपर से हरा धनिया और पुदीना गार्निश करें। गरमा-गरम खाने के साथ सर्व करें।
बस इतना सा काम और आपकी ठंडी-ठंडी देसी छाछ तैयार। मेरे घर में तो इसे “ठंडाई से भी ठंडा” कहते हैं।
💡 परफेक्ट छाछ के लिए गुरु टिप्स
- ✔ दही का तापमान: दही कमरे के तापमान पर हो – फ्रिज से निकालकर सीधा मथेंगे तो झाग ज्यादा बनता है और स्वाद अच्छा नहीं आता।
- ✔ काला नमक का इस्तेमाल: काला नमक छाछ को वही देसी स्वाद देता है। सफेद नमक से बनाएँगे तो फीका लगेगा।
- ✔ भुना जीरा पाउडर: हमेशा जीरा को हल्का भूनकर पीसें – इससे छाछ में स्मोकी फ्लेवर आता है।
- ✔ मीठी छाछ: अगर आपको मीठा पसंद है तो गुड़ या शक्कर पाउडर मिला सकते हैं। राजस्थान में कई जगह मीठी-नमकीन मिक्स भी चलती है।
✅ Do’s & ❌ Don’ts – छाछ बनाते समय
✨ Do’s
- हमेशा ताज़ा, खट्टा दही इस्तेमाल करें – फटा हुआ दही नहीं।
- छाछ को हाथ से मथना या चम्मच से फेंटना ज्यादा ऑथेंटिक है।
- परोसने से पहले बर्फ डालें – ठंडी छाछ का मज़ा ही अलग है।
- तड़का लगाते समय घी जरूर डालें, इससे पाचन में भी मदद मिलती है।
🚫 Don’ts
- बहुत ज्यादा पानी न डालें – नहीं तो छाछ फीकी लगेगी।
- मिक्सर में लंबे समय तक न फेंटें – दही का प्राकृतिक स्वाद खराब हो जाता है।
- ज्यादा मिर्च न डालें – छाछ हल्की मसालेदार होनी चाहिए, जलन वाली नहीं।
- सफेद नमक की जगह काला नमक ही डालें – यही देसी तरीका है।
⚠️ आम गलतियाँ और सुधार
👩🍳 पायल की स्पेशल टिप्स – दादी की याद
- 🌟 “सच कहूँ तो मुझे छाछ बनाना मेरी दादी से सीखा। वो कहती थीं, ‘बेटा, छाछ मथते समय मन शांत रखो, तभी स्वाद आता है।’ मैं अब भी उनके तरीके से हाथ से मथती हूँ।”
- 🌟 “एक छोटी सी ट्रिक – गर्मियों में छाछ में थोड़ा सा पुदीना और अदरक पीसकर डाल दो। पाचन भी ठीक रहता है और गर्मी से राहत मिलती है।”
- 🌟 “राजस्थानी घरों में खाने के बाद छाछ जरूर पी जाती है। अगर आपको कढ़ी या बाजरे की रोटी के साथ चाहिए तो तड़का लगाकर बनाएँ – लाजवाब लगती है।”
- 🌟 “और हाँ, छाछ बनाने के बाद उसे 10-15 मिनट फ्रिज में रख दें, सारे फ्लेवर सेट हो जाते हैं। आप भी जरूर ट्राई करो!”
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल – छाछ (मट्ठा)
1. छाछ और मट्ठा में क्या अंतर है?
दरअसल दोनों एक ही चीज़ हैं। मट्ठा मक्खन निकालने के बाद बचा हुआ पानी होता है, जबकि छाछ दही में पानी मिलाकर बनाई जाती है। राजस्थान में दोनों को समान रूप से ‘छाछ’ कहा जाता है।
2. छाछ फटने से कैसे बचाएँ?
हमेशा ताज़ा दही इस्तेमाल करें और पानी धीरे-धीरे डालें। अगर दही बहुत खट्टा है तो थोड़ा दूध मिला सकते हैं। फटने पर थोड़ा बेसन घोलकर मिलाएँ – गाढ़ापन ठीक हो जाएगा।
3. क्या छाछ व्रत में पी सकते हैं?
हाँ, व्रत (नवरात्रि, एकादशी) में भी छाछ पी सकते हैं। बस उसमें सेंधा नमक डालें और व्रत वाली सामग्री (जैसे व्रत वाला जीरा) इस्तेमाल करें।
4. How to make chaas without curd splitting?
Always use fresh, slightly sour curd at room temperature. Add water gradually while whisking continuously. If you use a blender, run it at low speed for a few seconds only. This ensures a smooth, non-split chaas.
5. What is the best way to make spiced buttermilk like Rajasthan dhabas?
Dhaba-style chaas has a tempering of ghee, mustard seeds, cumin, and dried red chili. Add crushed black pepper and fresh coriander. Serve with crushed ice – it gives that authentic roadside taste.
6. छाछ को गाढ़ा कैसे करें अगर बहुत पतली हो गई?
Agar bahut patli ho gayi hai toh thoda aur dahi ya malai mix karke ache se phir se madh sakte hain. Kuch log blended soaked poha bhi daalte hain – texture thick ho jata hai.
7. Can we add fruits to chaas? Koi healthy variation?
Bilkul! Mango chaas (aam ki lassi) bohat famous hai. Aap pudina, kheera, ya roasted jeera powder ke saath bhi bana sakte hain. Summer mein healthy and refreshing drink hai.
🎯 निष्कर्ष – घर पर बनाएं हेल्दी छाछ
तो अब आप जान गए होंगे कि छाछ (मट्ठा) बनाने का देसी तरीका – प्यास बुझाने वाला पेय कितना आसान है। बस चंद मिनटों में आप एक हेल्दी, ठंडी और पाचन सहायक ड्रिंक बना सकते हैं। राजस्थानी खाने की यह परंपरा सदियों पुरानी है और आज भी हर घर में इसे प्यार से बनाया जाता है।
मुझे उम्मीद है कि आप यह रेसिपी जरूर ट्राई करेंगे और अपने परिवार के साथ शेयर करेंगे। अगली बार मैं “आम पन्ना” या “जलजीरा” की रेसिपी लेकर आऊंगी। तब तक, यह ठंडी छाछ बनाइए और गर्मी से राहत पाइए। आपकी राय मेरे लिए बेहद जरूरी है – कमेंट में जरूर बताइए। शुभ कुकिंग और जय राजस्थान! 🥛🌞
✍️ पायल, जयपुर – एक पैशनेट होम कुक, जो राजस्थानी और मारवाड़ी खाने की ऑथेंटिक रेसिपीज़ को पीढ़ियों से सीख रही है। rajasthanikhana.com पर वो अपनी दादी-नानी की विरासत को हर डिश में जीवंत रखती हैं। जयपुर की गलियों से लेकर राजस्थान के गाँवों तक का स्वाद आपकी रसोई तक पहुँचाना उनका मिशन है।
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